प्रतापगढ़ । पूरे माधव सिंह में श्री माधवेश्वर महादेव सेवा समिति द्वारा आयोजित श्री राम कथा की अमृत वर्षा हो रही है। समिति द्वारा 23 वां त्रिदिवसीय मानस संत सम्मेलन एवं संगीतमय रामकथा संपन्न कराई जा रही है। कथा व्यास पंडित दिनेश त्रिपाठी मानस मधुकर ने राम कथा के चर्चा करते हुए कहा कि मानस रूपी सरोवर में चार घाट एवं 7 सोपान है। ज्ञान उपासना भक्ति तथा शरणागति चारों घाट है। जब जीव समस्त रूप में एकाग्र चित्त होकर भगवान की शरणागति को प्राप्त करता है उसका कल्याण होना निश्चित है। भगवान शंकर ने एक बार माता सती के साथ कुंभज ऋषि के पास जाकर कथा श्रवण करने के लिए गए। शंकर जी ने रामकथा को अपने हृदय में धारण किया । माता सती ने तर्क और वितर्क किया जिसके कारण उन्हें अपने पिता दक्ष के यज्ञ में समाधि लेनी पड़ी। राम कथा तर्क कुतर्क का विषय नहीं है। धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा “रचि महेश निज मानस राखा पाइ सुसमय शिवा सन भाखा” भगवान श्रीमन्नारायण मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के रूप में ब्रह्मा की 39 वीं पीढ़ी में राजा दशरथ के यहां अवतरित हुए और महाराज निमि की 21 वीं पीढ़ी में माता लक्ष्मी राजा सीरध्वज के यहां मिथिलापुरी में हल चलाते समय एक कुंभ से प्रकट हुई जिनका नाम वैदेही पड़ा और प्रभु श्रीराम से आपका पाणि ग्रहण संस्कार हुआ। माता कैकेई के वरदान स्वरूप प्रभु सीता जी एवं शेषावतार अवतार लक्ष्मण जी के साथ 14 वर्ष जंगलों में बिताया। प्रत्येक दिन उनके श्री चरणों में कांटे कंकड चुभते थे रहे लेकिन एक दिन ऐसा भी था की माता के पैरों में कंकड़ नहीं चुभे और वह स्थान आज का प्रतापगढ़ है, क्योंकि उस दिन वह मंत्री सुमंत जी के द्वारा चलाए जा रहे रथ पर विराजमान थी। सायंकाल श्रृंगवेरपुर पहुंचकर दूसरे दिन वलकल वस्त्र धारण कर प्रभु श्रीराम वन की ओर गए। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान ने प्रभु श्री राम ने लंका में 87 दिनों तक रह कर 72 दिन युद्ध किया और 15 दिन तक युद्ध का विराम रहा। 35 वर्ष की आयु में माता सीता ने लव कुश ने वाल्मीकि जी के आश्रम में जन्म लिया। 47 वर्ष की आयु में माता सीता इस धरा में समाहित हो गई। भगवान प्रभु श्रीराम ने 10000 वर्षों तक राज्य किया।वह रामराज्य हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है। भाई को भाई के प्रति पुत्र को माता पिता के प्रति अपने गुरु के प्रति एवं स्त्रियों को अपने पति के प्रति क्या करना चाहिए यह सब शिक्षा श्री रामचरितमानस में मिलती है। इस अवसर पर धर्माचार्य द्वारा कथा व्यास एवं आयोजक ओमप्रकाश सिंह को अंगवस्त्रम तथा पुष्पगुच्छ मां बाराही महात्मय की पुस्तक एवं भगवान श्री जगन्नाथ जी का प्रसाद प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शेर बहादुर सिंह संतोष दुबे पूर्व सभासद गिरीश चंद्र मिश्रा सत्यवान सिंह राजेश सिंह विजय प्रताप सिंह अरुण कुमार शुक्ला बद्री प्रसाद पांडे रमाकांत तिवारी संतोष कुमार सिंह आद्या प्रसाद तिवारी बिंदेश्वरी सिंह सहित भारी संख्या में भक्तजन पुरुष और महिलाएं एकत्रित रहे। कार्यक्रम का संचालन ग्राम प्रधान विनीत कुमार सिंह मोनू भैया के द्वारा संपन्न कराया गया।
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रामकथा कुतर्क का विषय नहीं :- विवेक त्रिपाठी मानस मधुकर
प्रतापगढ़ । पूरे माधव सिंह में श्री माधवेश्वर महादेव सेवा समिति द्वारा आयोजित श्री राम कथा की अमृत वर्षा हो रही है। समिति द्वारा 23 वां त्रिदिवसीय मानस संत सम्मेलन एवं संगीतमय रामकथा संपन्न कराई जा रही है। कथा व्यास पंडित दिनेश त्रिपाठी मानस मधुकर ने राम कथा के चर्चा करते हुए कहा कि मानस रूपी सरोवर में चार घाट एवं 7 सोपान है। ज्ञान उपासना भक्ति तथा शरणागति चारों घाट है। जब जीव समस्त रूप में एकाग्र चित्त होकर भगवान की शरणागति को प्राप्त करता है उसका कल्याण होना निश्चित है। भगवान शंकर ने एक बार माता सती के साथ कुंभज ऋषि के पास जाकर कथा श्रवण करने के लिए गए। शंकर जी ने रामकथा को अपने हृदय में धारण किया । माता सती ने तर्क और वितर्क किया जिसके कारण उन्हें अपने पिता दक्ष के यज्ञ में समाधि लेनी पड़ी। राम कथा तर्क कुतर्क का विषय नहीं है। धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा “रचि महेश निज मानस राखा पाइ सुसमय शिवा सन भाखा” भगवान श्रीमन्नारायण मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के रूप में ब्रह्मा की 39 वीं पीढ़ी में राजा दशरथ के यहां अवतरित हुए और महाराज निमि की 21 वीं पीढ़ी में माता लक्ष्मी राजा सीरध्वज के यहां मिथिलापुरी में हल चलाते समय एक कुंभ से प्रकट हुई जिनका नाम वैदेही पड़ा और प्रभु श्रीराम से आपका पाणि ग्रहण संस्कार हुआ। माता कैकेई के वरदान स्वरूप प्रभु सीता जी एवं शेषावतार अवतार लक्ष्मण जी के साथ 14 वर्ष जंगलों में बिताया। प्रत्येक दिन उनके श्री चरणों में कांटे कंकड चुभते थे रहे लेकिन एक दिन ऐसा भी था की माता के पैरों में कंकड़ नहीं चुभे और वह स्थान आज का प्रतापगढ़ है, क्योंकि उस दिन वह मंत्री सुमंत जी के द्वारा चलाए जा रहे रथ पर विराजमान थी। सायंकाल श्रृंगवेरपुर पहुंचकर दूसरे दिन वलकल वस्त्र धारण कर प्रभु श्रीराम वन की ओर गए। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान ने प्रभु श्री राम ने लंका में 87 दिनों तक रह कर 72 दिन युद्ध किया और 15 दिन तक युद्ध का विराम रहा। 35 वर्ष की आयु में माता सीता ने लव कुश ने वाल्मीकि जी के आश्रम में जन्म लिया। 47 वर्ष की आयु में माता सीता इस धरा में समाहित हो गई। भगवान प्रभु श्रीराम ने 10000 वर्षों तक राज्य किया।वह रामराज्य हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है। भाई को भाई के प्रति पुत्र को माता पिता के प्रति अपने गुरु के प्रति एवं स्त्रियों को अपने पति के प्रति क्या करना चाहिए यह सब शिक्षा श्री रामचरितमानस में मिलती है। इस अवसर पर धर्माचार्य द्वारा कथा व्यास एवं आयोजक ओमप्रकाश सिंह को अंगवस्त्रम तथा पुष्पगुच्छ मां बाराही महात्मय की पुस्तक एवं भगवान श्री जगन्नाथ जी का प्रसाद प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शेर बहादुर सिंह संतोष दुबे पूर्व सभासद गिरीश चंद्र मिश्रा सत्यवान सिंह राजेश सिंह विजय प्रताप सिंह अरुण कुमार शुक्ला बद्री प्रसाद पांडे रमाकांत तिवारी संतोष कुमार सिंह आद्या प्रसाद तिवारी बिंदेश्वरी सिंह सहित भारी संख्या में भक्तजन पुरुष और महिलाएं एकत्रित रहे। कार्यक्रम का संचालन ग्राम प्रधान विनीत कुमार सिंह मोनू भैया के द्वारा संपन्न कराया गया।



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