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दमा एवं चर्मरोगियो के लिए मुसीबत बना जाड़ा

प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। आमतौर पर जाड़े का मौसम सेहत के लिए काफी अनुकूल माना जाता है। इसमें संक्रामक रोगो का खतरा भी कम रहता है। इसलिए लोग जमकर भोजन करते है। तरह तरह के पकवानो का लुत्फ भी इस मौसम में उठाया जा सकता है। वही यह मौसम श्वसन सम्बंधी बीमारियों एवं चर्मरोग को बढ़ाने में काफी मददगार होता है। इसलिए जाड़ा छोटे बच्चो एवं बूढ़ो के लिए मुसीबत बन जाता है। इस समय ठण्ड ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। सर्दी में लोग सर्दी जुकाम बुखार एवं खासी से पीड़ित हो जाते है। वही बच्चो एवं बूढ़ो के लिए यह मौसम कष्टदायी हो जाता है। कभी कभी बच्चो को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। इससे उनकी हालत खराब हो जाती है। ऐसी हालत में यदि बच्चो का उचित इलाज न कराया गया तो उनके लिए घातक हो जाता है। गांवो में अधिक परेशानी होती है। चिकित्सक के अभाव में बच्चो का समुचित इलाज नहीं हो पाता है। इससे रोग काफी गंभीर हो जाता है। इसके अतिरिक्त दमा एवं अन्य श्वसन सम्बंधी बीमारियों का प्रकोप भी तेज हो जाता है। ठण्ड बढ़ते ही दमा के रोगी सांस लेने में दिक्कत महसूस करने लगते है। इस बीमारी के रोगाणु भी सक्रिय हो जाते है। इस समय खुजली के मरीजो की संख्या भी बढ़ जाती है। कमर एवं जोड़ो का दर्द भी बढ़ जाता है। खासकर महिलाएं कमर दर्द से परेशान रहती है। इस मौसम में अधिकांश लोग श्वसन सम्बंधी बीमारियों से परेशान रहते है। यह बीमारी मुख्य रूप से दमा एवं खासी की वजह से होती है। जुकाम एवं बुखार से पीड़ित बच्चो को भी सांस लेने में दिक्कत होती है। चिकित्सको का कहना है कि मरीज को समय से इलाज मिल जाए तो ठीक हो जाता है। साथ ही इलाज भी सस्ता पड़ता है।

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प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। आमतौर पर जाड़े का मौसम सेहत के लिए काफी अनुकूल माना जाता है। इसमें संक्रामक रोगो का खतरा भी कम रहता है। इसलिए लोग जमकर भोजन करते है। तरह तरह के पकवानो का लुत्फ भी इस मौसम में उठाया जा सकता है। वही यह मौसम श्वसन सम्बंधी बीमारियों एवं चर्मरोग को बढ़ाने में काफी मददगार होता है। इसलिए जाड़ा छोटे बच्चो एवं बूढ़ो के लिए मुसीबत बन जाता है। इस समय ठण्ड ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। सर्दी में लोग सर्दी जुकाम बुखार एवं खासी से पीड़ित हो जाते है। वही बच्चो एवं बूढ़ो के लिए यह मौसम कष्टदायी हो जाता है। कभी कभी बच्चो को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। इससे उनकी हालत खराब हो जाती है। ऐसी हालत में यदि बच्चो का उचित इलाज न कराया गया तो उनके लिए घातक हो जाता है। गांवो में अधिक परेशानी होती है। चिकित्सक के अभाव में बच्चो का समुचित इलाज नहीं हो पाता है। इससे रोग काफी गंभीर हो जाता है। इसके अतिरिक्त दमा एवं अन्य श्वसन सम्बंधी बीमारियों का प्रकोप भी तेज हो जाता है। ठण्ड बढ़ते ही दमा के रोगी सांस लेने में दिक्कत महसूस करने लगते है। इस बीमारी के रोगाणु भी सक्रिय हो जाते है। इस समय खुजली के मरीजो की संख्या भी बढ़ जाती है। कमर एवं जोड़ो का दर्द भी बढ़ जाता है। खासकर महिलाएं कमर दर्द से परेशान रहती है। इस मौसम में अधिकांश लोग श्वसन सम्बंधी बीमारियों से परेशान रहते है। यह बीमारी मुख्य रूप से दमा एवं खासी की वजह से होती है। जुकाम एवं बुखार से पीड़ित बच्चो को भी सांस लेने में दिक्कत होती है। चिकित्सको का कहना है कि मरीज को समय से इलाज मिल जाए तो ठीक हो जाता है। साथ ही इलाज भी सस्ता पड़ता है।

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