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कार्तिक मास में एक तुलसी पत्र से भी भगवान नारायण होते हैं अति प्रसन्न:– धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

प्रतापगढ़ । प्रबोधिनी एकादशी के पावन पर्व पर रामानुज आश्रम संत रामानुज मार्ग पर  भगवान शालिग्राम का दूध दही घी मधु शक्कर एवं गंगाजल से अभिषेक किया गया। तुलसी के पत्रों के द्वारा विशेष पूजन अर्चन करने के पश्चात धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा कि कार्तिक मास में तुलसी का विशेष महत्व है। यदि एक तुलसी के दल या तुलसी पत्रों से भी कोई कार्तिक मास में भगवान शालिग्राम की सेवा करता है तो भगवान श्रीमन्नारायण अति प्रसन्न होते हैं। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड के अनुसार भगवान श्री विष्णु एवं विष्णु तीर्थ के समान ही कार्तिक मास को श्रेष्ठ और दुर्लभ कहा गया है। कार्तिक मास धर्म अर्थ काम व मोक्ष को देने वाला रोग विनाशक सद्बुद्धि देने वाला लक्ष्मी का साधक तथा दुखों से मुक्ति प्रदान करने वाला माना गया है। कार्तिक स्नान व्रत करने वाले मनुष्य के शरीर में सारे तीर्थ निवास करते हैं और उसे देखकर यमदूत उसी प्रकार पलायन कर जाते हैं जैसे सिंह से पीड़ित होकर हाथी पलायन कर जाते हैं। जिन लोगों ने कार्तिक व्रत का सेवन नहीं किया है वह एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक प्रातः काल उठकर सूर्योदय से पहले स्नान करके भगवान नारायण की आराधना करें। श्री वैष्णव लोग भगवान के मूल मंत्र का जप करें।  ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देकर संतुष्ट करें। यदि हम ज्यादा दान दक्षिणा नहीं दे सकते हैं तो कम से कम एक ब्राह्मण या एक ब्राह्मणी को अवश्य प्रसाद पवाएं। इससे भगवान लक्ष्मी नारायण को अति प्रसन्नता होती है और महालक्ष्मी की कृपा भी उस पर बरसती है। इसी क्रम में संत निवास सेनानी ग्राम देवली परसन पांडे का पुरवा में धर्माचार्य द्वारा तुलसी के वृक्षों का रोपण किया गया। उक्त अवसर पर नारायणी रामानुज दासी डॉ अवंतिका पांडे प्रणव पांडे सुरजीत वर्मा राम सजीवन वर्मा लालाराम विपिन कुमार धीरेंद्र सिंह भीम सिंह शुभम सिंह अर्जुन वर्मा सहित अनेक भक्त गण उपस्थित रहे। सर्वसम्मति से तय पाया गया कि दिनांक 17 नवंबर को भगवान श्रीमन्नारायण एवं माता तुलसी का विवाहोत्सव संत निवास पर धूमधाम से मनाया जाएगा।

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प्रतापगढ़ । प्रबोधिनी एकादशी के पावन पर्व पर रामानुज आश्रम संत रामानुज मार्ग पर  भगवान शालिग्राम का दूध दही घी मधु शक्कर एवं गंगाजल से अभिषेक किया गया। तुलसी के पत्रों के द्वारा विशेष पूजन अर्चन करने के पश्चात धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा कि कार्तिक मास में तुलसी का विशेष महत्व है। यदि एक तुलसी के दल या तुलसी पत्रों से भी कोई कार्तिक मास में भगवान शालिग्राम की सेवा करता है तो भगवान श्रीमन्नारायण अति प्रसन्न होते हैं। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड के अनुसार भगवान श्री विष्णु एवं विष्णु तीर्थ के समान ही कार्तिक मास को श्रेष्ठ और दुर्लभ कहा गया है। कार्तिक मास धर्म अर्थ काम व मोक्ष को देने वाला रोग विनाशक सद्बुद्धि देने वाला लक्ष्मी का साधक तथा दुखों से मुक्ति प्रदान करने वाला माना गया है। कार्तिक स्नान व्रत करने वाले मनुष्य के शरीर में सारे तीर्थ निवास करते हैं और उसे देखकर यमदूत उसी प्रकार पलायन कर जाते हैं जैसे सिंह से पीड़ित होकर हाथी पलायन कर जाते हैं। जिन लोगों ने कार्तिक व्रत का सेवन नहीं किया है वह एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक प्रातः काल उठकर सूर्योदय से पहले स्नान करके भगवान नारायण की आराधना करें। श्री वैष्णव लोग भगवान के मूल मंत्र का जप करें।  ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देकर संतुष्ट करें। यदि हम ज्यादा दान दक्षिणा नहीं दे सकते हैं तो कम से कम एक ब्राह्मण या एक ब्राह्मणी को अवश्य प्रसाद पवाएं। इससे भगवान लक्ष्मी नारायण को अति प्रसन्नता होती है और महालक्ष्मी की कृपा भी उस पर बरसती है। इसी क्रम में संत निवास सेनानी ग्राम देवली परसन पांडे का पुरवा में धर्माचार्य द्वारा तुलसी के वृक्षों का रोपण किया गया। उक्त अवसर पर नारायणी रामानुज दासी डॉ अवंतिका पांडे प्रणव पांडे सुरजीत वर्मा राम सजीवन वर्मा लालाराम विपिन कुमार धीरेंद्र सिंह भीम सिंह शुभम सिंह अर्जुन वर्मा सहित अनेक भक्त गण उपस्थित रहे। सर्वसम्मति से तय पाया गया कि दिनांक 17 नवंबर को भगवान श्रीमन्नारायण एवं माता तुलसी का विवाहोत्सव संत निवास पर धूमधाम से मनाया जाएगा।

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