लक्ष्मी गणेश की मूर्तियो से सजा रहा बाजार बाजारो में देर रात तक खरीददारो की रही भीड़
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। सुख समृद्धि देने वाले पर्व धनतेरस पर जिले भर में उत्साह और उमंग का माहौल रहा। छोटी व बड़ी बाजारो में बर्तन, आभूषण एवं अन्य सामग्रियो की दुकाने सजी रही। शहर में सबसे ज्यादा चहल पहल चैक घण्टाघर क्षेत्र में रहे। वाहनो पर प्रतिबंध न होने के कारण वहां पर जाम की स्थिति बनी रही। धनतेरस पर्व की तैयारी दुकानदारो ने पहले ही कर लिया था। साथ ही अपनी दुकानो को आकर्षक ढंग से सजाया था। शहर के लोग दोपहर से ही धनतेरस की खरीददारी करने के लिए बाजारो में पहुंचने लगे थे। शाम होते होते चैक, ठठेरी बाजार में तो तिल रखने की जगह नहीं बची। दुकानदारो द्वारा अपनी दुकानो को सड़क की पटरियों पर काफी आगे बढ़ाकर लगा दिया गया था। इससे यातायात भी प्रभावित हो रहा था। उसी में वाहनो का आवागमन भी समस्या उत्पन्न कर रहा था। परिवार के साथ खरीददारी करने आए लोग जाम में जूझते रहे। ज्यादा समस्या तब होती थी जब कोई वाहन भीड़ में घुस जाता था। जाम के बावजूद बर्तनो की दुकानो पर अपार भीड़ देखी गई। लोग अपनी जरूरत के अनुसार कुछ न कुछ खरीद रहे थे। बर्तन व्यवसायी भी नये नये डिजाइन के बर्तन ग्राहको को दिखाने में व्यस्त थे। अधिक बिक्री स्टील के बर्तनो की हुई। कुछ लोग तांबा, पीतल और चांदी के बर्तन भी खरीद रहे थे। यही नजारा आभूषणो की दुकानो पर भी दिखाई पड़ा। वहां पर पुरूषो से अधिक महिलाओ की भीड़ दिखाई पड़ी। वे अपनी मनपसंद ज्वैलरी के साथ ही चांदी व सोने के सिक्के भी पूजन के लिए खरीद रही थी। खील, बताशे, मिठाइयां व साज सज्जा के सामान भी खूब बिके। उधर ग्रामीण अंचलो में भी धनतेरस व दीपावली की धूम मची हुई है। लोग बाजारो में खरीददारी के लिए उमड़ पड़े है। अपनी जेब के अनुसार लोग खरीददारी कर रहे थे। हालांकि महंगाई के कारण अब लोगो में पहले की तरह उमंग नहीं दिखाई पड़ती। आज आधुनिक युग की चकाचैंध में दीपावली भी फैशन बनकर रह गई है। गांव के कुम्भकार आज भी अपनी चाक दीपावली पर चलाते है। साथ ही अपने हाथो से मिट्टी के दीये गढ़ कर उसे गांव गांव बेचते है।
लक्ष्मी गणेश की मूर्तियो से सजा रहा बाजार बाजारो में देर रात तक खरीददारो की रही भीड़
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। सुख समृद्धि देने वाले पर्व धनतेरस पर जिले भर में उत्साह और उमंग का माहौल रहा। छोटी व बड़ी बाजारो में बर्तन, आभूषण एवं अन्य सामग्रियो की दुकाने सजी रही। शहर में सबसे ज्यादा चहल पहल चैक घण्टाघर क्षेत्र में रहे। वाहनो पर प्रतिबंध न होने के कारण वहां पर जाम की स्थिति बनी रही। धनतेरस पर्व की तैयारी दुकानदारो ने पहले ही कर लिया था। साथ ही अपनी दुकानो को आकर्षक ढंग से सजाया था। शहर के लोग दोपहर से ही धनतेरस की खरीददारी करने के लिए बाजारो में पहुंचने लगे थे। शाम होते होते चैक, ठठेरी बाजार में तो तिल रखने की जगह नहीं बची। दुकानदारो द्वारा अपनी दुकानो को सड़क की पटरियों पर काफी आगे बढ़ाकर लगा दिया गया था। इससे यातायात भी प्रभावित हो रहा था। उसी में वाहनो का आवागमन भी समस्या उत्पन्न कर रहा था। परिवार के साथ खरीददारी करने आए लोग जाम में जूझते रहे। ज्यादा समस्या तब होती थी जब कोई वाहन भीड़ में घुस जाता था। जाम के बावजूद बर्तनो की दुकानो पर अपार भीड़ देखी गई। लोग अपनी जरूरत के अनुसार कुछ न कुछ खरीद रहे थे। बर्तन व्यवसायी भी नये नये डिजाइन के बर्तन ग्राहको को दिखाने में व्यस्त थे। अधिक बिक्री स्टील के बर्तनो की हुई। कुछ लोग तांबा, पीतल और चांदी के बर्तन भी खरीद रहे थे। यही नजारा आभूषणो की दुकानो पर भी दिखाई पड़ा। वहां पर पुरूषो से अधिक महिलाओ की भीड़ दिखाई पड़ी। वे अपनी मनपसंद ज्वैलरी के साथ ही चांदी व सोने के सिक्के भी पूजन के लिए खरीद रही थी। खील, बताशे, मिठाइयां व साज सज्जा के सामान भी खूब बिके। उधर ग्रामीण अंचलो में भी धनतेरस व दीपावली की धूम मची हुई है। लोग बाजारो में खरीददारी के लिए उमड़ पड़े है। अपनी जेब के अनुसार लोग खरीददारी कर रहे थे। हालांकि महंगाई के कारण अब लोगो में पहले की तरह उमंग नहीं दिखाई पड़ती। आज आधुनिक युग की चकाचैंध में दीपावली भी फैशन बनकर रह गई है। गांव के कुम्भकार आज भी अपनी चाक दीपावली पर चलाते है। साथ ही अपने हाथो से मिट्टी के दीये गढ़ कर उसे गांव गांव बेचते है।



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