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पाठ्यक्रम में सेनानियो का इतिहास शामिल करना जरूरी: डा. पाण्डेय

आजादी के अमृत महोत्सव पर संगोष्ठी आयोजित
प्रतापगढ़। प्रताप बहादुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय प्रतापगढ़ सिटी में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में आजादी के 75वें वर्ष अमृत महोत्सव के अवसर पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन सबोध स्वराज एवं प्रतिरोध का इतिहास विषय पर प्रो. सुमन जैन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी के प्रतिमा पर मुख्य अतिथि बाल मुकुंद पाण्डेय राष्ट्रीय संगठन सचिव एवं राजा अनिल प्रताप सिंह ने दीप प्रज्जवलन करके किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संगठन सचिव बाल मुकुंद पाण्डेय ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियो के इतिहास को लेकर सन् 1917 मे झींगुरी सिंह द्वारा किसान आंदोलन में सन् 1915 मे गांधी जी द्वारा सहयोग आंदोलन, नमक आंदोलन आदि के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि आज पाठ्यक्रम में हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियो के इतिहास को विस्तार पूर्वक पढ़ाना चाहिए। 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन में गांधी जी ने कहा कि यह मेरा नया अवतार है। रेल, डाक, टेलीफोन आदि सेवाओ को बाधित कर आम जनमानस को गुलामी से मुक्त कराने के लिए बड़ा आंदोलन चलाया था। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के अध्यक्ष डा. देवी प्रसाद सिंह ने कहा कि संगत से ही सद्गुणो का विकास होता है और संगत से ही सद्गुणो का विनाश्श होता है। उन्होने कहा प्रतापगढ़ की धरती वीरो की धरती है। हमे पूर्वजो के बलिदान को सदैव स्मरण करते रहना चाहिए। महाविद्यालय के प्रबंधक राजा अनिल सिंह ने कहा कि भारत वैदिक काल से विश्श्व गुरू रहा है। नालंदा एवं तक्षश्शिक्षा जैसे विश्श्वविद्यालय में विश्श्व के अधिकांश्श देश्शो से यहां पर श्शिक्षा लेने आते थे। लेकिन गुलामी के समय भारतीय संस्कृत को नष्ट करने के लिए विदेश्शियो द्वारा नालंदा विश्श्वविद्यालय को जला दिया गया जिसमें लगभग 90 लाख किताबे जला दी गई थी। इश्श्वर शरण पीजी कालेज के प्राचार्य प्रो. आनन्द शस्कर सिंह ने कहा कि प्राचीन काल में भारतीय किसानो का शोषण और जमीदारी का प्रचलन था। उन्होने कहा युवा पीढ़ियो को भारतीय संस्कृत के बारे में जानना चाहिए तथा प्रतापगढ़ के क्रांतिकारियो को याद किया जाना चाहिए। संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में डा. सर्वेश्श सिंह, डा. विनोद त्रिपाठी, डा. राजेश मिश्र, डा. पीयूष कांत शर्मा, डा. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने संगोष्ठी में अपने विचार रखे। समापन सत्र में राष्ट्रीय सह संगठन सचिव संजय ने कहा पुर्तगाली सबसे पहले आये और स्वागत करने वालो का हाथ काट लिए व ईसाई धर्म का प्रचार और यहां पर कब्जा करने के लिए आए थे। मुख्य अतिथि का राजा अनिल प्रताप सिंह ने अंगवस़्त्रम देकर सम्मानित किया। संगोष्ठी का संचालन पीयूष कांत शर्मा ने किया। आभार महाविद्यालय के प्राचार्य डा. बृजभानु सिंह ने किया। इस अवसर पर विभाग संघ चालक रमेश्श त्रिपाठी, विभाग प्रचार परितोष, उदयभान सिंह, डा. आर.के. सिंह, श्रीमती श्रद्धा सिंह, डा. विनोद, डा. सर्वेश्श सिंह, डा. चन्द्रप्रकाश्श, डा. विमलेश कुमार पांडेय, डा. संतोष शुक्ला, प्रभाकर पाण्डेय, अनिल देव जी, राजेश्श कुमार मिश्र, विनोद त्रिपाठी, रश्श्मि सिंह, डा. देवेश्श सिंह, डा. नीरज त्रिपाठी आदि लोग उपस्थित रहे।

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आजादी के अमृत महोत्सव पर संगोष्ठी आयोजित
प्रतापगढ़। प्रताप बहादुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय प्रतापगढ़ सिटी में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में आजादी के 75वें वर्ष अमृत महोत्सव के अवसर पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन सबोध स्वराज एवं प्रतिरोध का इतिहास विषय पर प्रो. सुमन जैन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी के प्रतिमा पर मुख्य अतिथि बाल मुकुंद पाण्डेय राष्ट्रीय संगठन सचिव एवं राजा अनिल प्रताप सिंह ने दीप प्रज्जवलन करके किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संगठन सचिव बाल मुकुंद पाण्डेय ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियो के इतिहास को लेकर सन् 1917 मे झींगुरी सिंह द्वारा किसान आंदोलन में सन् 1915 मे गांधी जी द्वारा सहयोग आंदोलन, नमक आंदोलन आदि के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि आज पाठ्यक्रम में हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियो के इतिहास को विस्तार पूर्वक पढ़ाना चाहिए। 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन में गांधी जी ने कहा कि यह मेरा नया अवतार है। रेल, डाक, टेलीफोन आदि सेवाओ को बाधित कर आम जनमानस को गुलामी से मुक्त कराने के लिए बड़ा आंदोलन चलाया था। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के अध्यक्ष डा. देवी प्रसाद सिंह ने कहा कि संगत से ही सद्गुणो का विकास होता है और संगत से ही सद्गुणो का विनाश्श होता है। उन्होने कहा प्रतापगढ़ की धरती वीरो की धरती है। हमे पूर्वजो के बलिदान को सदैव स्मरण करते रहना चाहिए। महाविद्यालय के प्रबंधक राजा अनिल सिंह ने कहा कि भारत वैदिक काल से विश्श्व गुरू रहा है। नालंदा एवं तक्षश्शिक्षा जैसे विश्श्वविद्यालय में विश्श्व के अधिकांश्श देश्शो से यहां पर श्शिक्षा लेने आते थे। लेकिन गुलामी के समय भारतीय संस्कृत को नष्ट करने के लिए विदेश्शियो द्वारा नालंदा विश्श्वविद्यालय को जला दिया गया जिसमें लगभग 90 लाख किताबे जला दी गई थी। इश्श्वर शरण पीजी कालेज के प्राचार्य प्रो. आनन्द शस्कर सिंह ने कहा कि प्राचीन काल में भारतीय किसानो का शोषण और जमीदारी का प्रचलन था। उन्होने कहा युवा पीढ़ियो को भारतीय संस्कृत के बारे में जानना चाहिए तथा प्रतापगढ़ के क्रांतिकारियो को याद किया जाना चाहिए। संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में डा. सर्वेश्श सिंह, डा. विनोद त्रिपाठी, डा. राजेश मिश्र, डा. पीयूष कांत शर्मा, डा. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने संगोष्ठी में अपने विचार रखे। समापन सत्र में राष्ट्रीय सह संगठन सचिव संजय ने कहा पुर्तगाली सबसे पहले आये और स्वागत करने वालो का हाथ काट लिए व ईसाई धर्म का प्रचार और यहां पर कब्जा करने के लिए आए थे। मुख्य अतिथि का राजा अनिल प्रताप सिंह ने अंगवस़्त्रम देकर सम्मानित किया। संगोष्ठी का संचालन पीयूष कांत शर्मा ने किया। आभार महाविद्यालय के प्राचार्य डा. बृजभानु सिंह ने किया। इस अवसर पर विभाग संघ चालक रमेश्श त्रिपाठी, विभाग प्रचार परितोष, उदयभान सिंह, डा. आर.के. सिंह, श्रीमती श्रद्धा सिंह, डा. विनोद, डा. सर्वेश्श सिंह, डा. चन्द्रप्रकाश्श, डा. विमलेश कुमार पांडेय, डा. संतोष शुक्ला, प्रभाकर पाण्डेय, अनिल देव जी, राजेश्श कुमार मिश्र, विनोद त्रिपाठी, रश्श्मि सिंह, डा. देवेश्श सिंह, डा. नीरज त्रिपाठी आदि लोग उपस्थित रहे।

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