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लार्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था को यदि ध्वस्त नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और भी होगी खराब: ऋतेश्वर महाराज

अयोध्या। वृंदावन से अयोध्या पहुंचे सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने सनातन संस्कृति की शिक्षा व सामान नागरिक संहिता कानून लागू करने की मांग है। उन्होंने कहा कि लार्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था को यदि ध्वस्त नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और भी खराब होगी, उन्होंने कहा कि यदि भारत की सांस्कृतिक पहचान बचाना है तो भारत मे गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली को लागू किया जाये, उन्होंने कहा गुरुकुल की शिक्षा व्यवस्था लागू होने से लोग खुद तो स्वावलंबी बनेंगे ही साथ ही दूसरों में भी रोजगारपरक बनाने के सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि आज भारत के लोग भले ही आजाद हो गये हैं लेकिन मानसिक तौर पर उन्हें अभी भी आजादी नहीं मिली है, उन्हें आजादी तभी मिलेगी जब लोग वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को त्याग कर भारत की सनातन संस्कृति की शिक्षा व्यवस्था को अपनाएंगे। उन्होंने सरकार से मांग उठाई है यदि भारत की सनातन धर्म संस्कृति को बचाना है तो सनातन संस्कृति शिक्षा व्यवस्था को लागू करना होगा, उन्होंने कहा कि आज इस बात को माना जायेगा तो आने वाले समय मे भारत की स्थिति बहुत खराब होगी। उन्होंने कहा कि पहले भारत में लोग गुरुकल जाकर शिक्षा ग्रहण करते थे अब हमारी पीढ़ी कानमेंट स्कूल की तरफ भाग रही है जो अंग्रजो द्वारा बनाया गया उसी तरह हम हिंदी शब्दों में भी अंग्रजी भाषा का प्रयोग करते है जो अंगेजो की देन है। उन्होंने कहा कि अंग्रजो ने हमारा देश ही नही लूट हमारी शिक्षा को भी लूट कर ले गये। इसी तरह  संविधान में भी भारतीय संस्कृति के अनुरूप होना चाहिए। किसानों के आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि उनकी मांग जायज है नेताओं को उनसे बात करके समस्याओं का निदान करना चाहिये। कहा कि भारत में अगले 30 वर्ष बाद नया बदलाव आएगा जिसका कारण भारत की नई शिक्षा नीति होगा। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सत्ता और पैसों से धन से उपन्न नहीं हुआ है यह मात्र धार्मिक ज्ञान से मिलता है। पैसों और संपत्ति के लिए जिसने ये काम किया, पीठ के लिए जिसने ये काम किया है तो यह सतयुग,  द्वापर और त्रेता में भी हुआ और अगर कलयुग में भी हो सकता हैं इससे सनातन धर्म और मजबूत होकर निकलेगा धर्म वास्तव में आत्मिक उन्नति, आनंद और आत्मज्ञान का नाम है। समाज और आने वाली पीढ़ियों को बताना पड़ेगा नहीं तो जवाब देते थक जाएंगे क्योंकि धार्मिक पीठ आसीन सन्तो पर यह जिम्मेदारी होती है वह लोगों के तनाव को कम करें

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अयोध्या। वृंदावन से अयोध्या पहुंचे सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने सनातन संस्कृति की शिक्षा व सामान नागरिक संहिता कानून लागू करने की मांग है। उन्होंने कहा कि लार्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था को यदि ध्वस्त नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और भी खराब होगी, उन्होंने कहा कि यदि भारत की सांस्कृतिक पहचान बचाना है तो भारत मे गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली को लागू किया जाये, उन्होंने कहा गुरुकुल की शिक्षा व्यवस्था लागू होने से लोग खुद तो स्वावलंबी बनेंगे ही साथ ही दूसरों में भी रोजगारपरक बनाने के सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि आज भारत के लोग भले ही आजाद हो गये हैं लेकिन मानसिक तौर पर उन्हें अभी भी आजादी नहीं मिली है, उन्हें आजादी तभी मिलेगी जब लोग वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को त्याग कर भारत की सनातन संस्कृति की शिक्षा व्यवस्था को अपनाएंगे। उन्होंने सरकार से मांग उठाई है यदि भारत की सनातन धर्म संस्कृति को बचाना है तो सनातन संस्कृति शिक्षा व्यवस्था को लागू करना होगा, उन्होंने कहा कि आज इस बात को माना जायेगा तो आने वाले समय मे भारत की स्थिति बहुत खराब होगी। उन्होंने कहा कि पहले भारत में लोग गुरुकल जाकर शिक्षा ग्रहण करते थे अब हमारी पीढ़ी कानमेंट स्कूल की तरफ भाग रही है जो अंग्रजो द्वारा बनाया गया उसी तरह हम हिंदी शब्दों में भी अंग्रजी भाषा का प्रयोग करते है जो अंगेजो की देन है। उन्होंने कहा कि अंग्रजो ने हमारा देश ही नही लूट हमारी शिक्षा को भी लूट कर ले गये। इसी तरह  संविधान में भी भारतीय संस्कृति के अनुरूप होना चाहिए। किसानों के आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि उनकी मांग जायज है नेताओं को उनसे बात करके समस्याओं का निदान करना चाहिये। कहा कि भारत में अगले 30 वर्ष बाद नया बदलाव आएगा जिसका कारण भारत की नई शिक्षा नीति होगा। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सत्ता और पैसों से धन से उपन्न नहीं हुआ है यह मात्र धार्मिक ज्ञान से मिलता है। पैसों और संपत्ति के लिए जिसने ये काम किया, पीठ के लिए जिसने ये काम किया है तो यह सतयुग,  द्वापर और त्रेता में भी हुआ और अगर कलयुग में भी हो सकता हैं इससे सनातन धर्म और मजबूत होकर निकलेगा धर्म वास्तव में आत्मिक उन्नति, आनंद और आत्मज्ञान का नाम है। समाज और आने वाली पीढ़ियों को बताना पड़ेगा नहीं तो जवाब देते थक जाएंगे क्योंकि धार्मिक पीठ आसीन सन्तो पर यह जिम्मेदारी होती है वह लोगों के तनाव को कम करें

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