विधि विधान से स्थापित हुई प्रतिमाएं 🔔 यह भी पढ़ें...
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। जनपद के शहरी एवं ग्रामीण इलाको में आज गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश की पूजा अर्चना शुरू हुई। साथ ही जगह जगह श्री गणेश की प्रतिमा भी विधि विधान के साथ स्थापित करके पूजा आराधना शुरू की गई। पुराणो के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर गणेश जी का जन्म हुआ। इसी कारण इस तिथि को गणेश चतुर्थी माना जाता है। इसीदिन से गणेश जन्मोत्सव को लेकर शुरू होने वाली आराधना दस दिनो तक चलती है। समस्त देवी देवताओ में प्रथम पूज्य कहे जाने वाले श्री गणेश से जुड़ी विभिन्न कथाओ का शिव पुराण, पद्म पुराण, ब्रम्हवर्त पुराण आदि में सजीव वर्णन मिलता है। एक प्रचलित कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर में लगे उबटन को निकालकर उसे एक आकृति का रूप दिया। साथ ही मन में संतान की कल्पना किया तो आकृति ने गणेश जी के रूप में शरीर धारण कर माता पार्वती को प्रणाम किया। साथ ही वह पार्वती पुत्र कहलाए। एक अन्य कथा के अनुसार माता पार्वती के आदेशानुसार मुख्य द्वार पर पहरा दे रहे उनके पुत्र गणेश ने जब अपने पिता शिवजी को ही अंदर जाने से रोक दिया तो क्रोध में आए शिव ने गणेश का सिर उनके धड़ से अलग कर दिया। अपने पुत्र के कटे धड़ को देख पार्वती के क्रोश करने पर शिव ने उनके क्रोध को शात करने के लिए एक हाथी का सिर गणेश जी के धड़ से जोड़ दिया। तभी से वे गजानन कहलाने के साथ ही प्रथम पूज्य भी बने। शुक्रवार को शहर में स्थित सोनारी मोहल्ला समेत अन्य कई स्थानो पर पण्डालो में भगवान गणपति की प्रतिमा की स्थापना विधि विधान के साथ की गई। इसके अलावा ग्रामीण अंचलो में स्थित लालगंज, सांगीपुर, रानीगंज कैथौला, रानीगंज अजगरा, लीलापुर सगरासुंदरपुर, रानीगंज, भुपियामऊ, पट्टी, दीवानगंज, कुण्डा महेशगंज बाघराय जेठवारा मानधाता आदि स्थानो पर गणेश जी के प्रतिमा की स्थापना की गई। साथ ही गणपति पूजन की धूम भी शुरू हो गई। तमाम लोगो ने घर में भी गणपति की प्रतिमा स्थापित करके पूजन अर्चन शुरू कर दिया है। दस दिनो तक चलने वाले गणेश जन्मोत्सव को लेकर पण्डालो में जगह जगह विराजित गणेश प्रतिमा की अनुपम छवि के साथ झाकियो में श्रीगणेश की विभिन्न लीलाएं भी परिलक्षित हो रही है।
विधि विधान से स्थापित हुई प्रतिमाएं
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। जनपद के शहरी एवं ग्रामीण इलाको में आज गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश की पूजा अर्चना शुरू हुई। साथ ही जगह जगह श्री गणेश की प्रतिमा भी विधि विधान के साथ स्थापित करके पूजा आराधना शुरू की गई। पुराणो के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर गणेश जी का जन्म हुआ। इसी कारण इस तिथि को गणेश चतुर्थी माना जाता है। इसीदिन से गणेश जन्मोत्सव को लेकर शुरू होने वाली आराधना दस दिनो तक चलती है। समस्त देवी देवताओ में प्रथम पूज्य कहे जाने वाले श्री गणेश से जुड़ी विभिन्न कथाओ का शिव पुराण, पद्म पुराण, ब्रम्हवर्त पुराण आदि में सजीव वर्णन मिलता है। एक प्रचलित कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर में लगे उबटन को निकालकर उसे एक आकृति का रूप दिया। साथ ही मन में संतान की कल्पना किया तो आकृति ने गणेश जी के रूप में शरीर धारण कर माता पार्वती को प्रणाम किया। साथ ही वह पार्वती पुत्र कहलाए। एक अन्य कथा के अनुसार माता पार्वती के आदेशानुसार मुख्य द्वार पर पहरा दे रहे उनके पुत्र गणेश ने जब अपने पिता शिवजी को ही अंदर जाने से रोक दिया तो क्रोध में आए शिव ने गणेश का सिर उनके धड़ से अलग कर दिया। अपने पुत्र के कटे धड़ को देख पार्वती के क्रोश करने पर शिव ने उनके क्रोध को शात करने के लिए एक हाथी का सिर गणेश जी के धड़ से जोड़ दिया। तभी से वे गजानन कहलाने के साथ ही प्रथम पूज्य भी बने। शुक्रवार को शहर में स्थित सोनारी मोहल्ला समेत अन्य कई स्थानो पर पण्डालो में भगवान गणपति की प्रतिमा की स्थापना विधि विधान के साथ की गई। इसके अलावा ग्रामीण अंचलो में स्थित लालगंज, सांगीपुर, रानीगंज कैथौला, रानीगंज अजगरा, लीलापुर सगरासुंदरपुर, रानीगंज, भुपियामऊ, पट्टी, दीवानगंज, कुण्डा महेशगंज बाघराय जेठवारा मानधाता आदि स्थानो पर गणेश जी के प्रतिमा की स्थापना की गई। साथ ही गणपति पूजन की धूम भी शुरू हो गई। तमाम लोगो ने घर में भी गणपति की प्रतिमा स्थापित करके पूजन अर्चन शुरू कर दिया है। दस दिनो तक चलने वाले गणेश जन्मोत्सव को लेकर पण्डालो में जगह जगह विराजित गणेश प्रतिमा की अनुपम छवि के साथ झाकियो में श्रीगणेश की विभिन्न लीलाएं भी परिलक्षित हो रही है।



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