हिन्दू धर्म व मंदिरों के संरक्षण व विकास को मिलेगा नया आयाम: समाज शेखर
प्रसिद्ध पांडव कालीन भयहरणनाथ धाम में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की सराहना हो रही है कि देवी देवता ही मंदिर की भूमि के मालिक है। साथ ही पुजारी प्रबन्ध व्यवस्था को सेवक माना है। धाम की प्रबन्ध समिति ने बैठक करके खुशी जाहिर की है। भयहरणनाथ धाम की प्रबन्ध समिति के महासचिव समाज शेखर ने कहा कि भयहरणनाथ धाम में यहां के समाज ने प्रारम्भ से ही सामूहिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए मंदिर का प्रबन्ध जिम्मेदारी से किया जा रहा है। जो आदेश आज सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के मालिक के रूप में देवता के पक्ष में निर्णय दिया है इस संदर्भ में यहां की प्रबन्ध समिति ने समय समय पर ऐसे निर्णय विगत 10 वर्षों में कई बार तय किये है। आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसकी गहन विवेचना करते हुए ऐतिहासिक फैसला दिया है। जिससे हमारे हिन्दू धर्म व मंदिरों का संरक्षण व विकास प्रक्रिया को एक नया आयाम प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पुजारी या प्रबंधन संपति का प्रबंधन के प्रति उत्तरदाई है , लेकिन स्वामित्व सिर्फ देवता के नाम अंकित होगा। इस फैसले से उत्तरदायित्व ठीक से न निभाने पर हटाये जाने का भी आदेश देना मठ मंदिरों के अनावश्यक हो रहे व्यक्तिगत कब्जो को भी रोकेगा। सभी ने उच्चतम न्यायालय के इस फैसले की सराहना करते हुए मठ मंदिरों के संरक्षण व विकास के लिए अद्वितीय फैसला बताया। इस अवसर पर अध्यक्ष अरविंद नारायण त्रिपाठी, उपाध्यक्ष प्रशासन बबन सिंह, उपाध्यक्ष कार्यक्रम राज कुमार शुक्ल, कोषाध्यक्ष लाल जी सिंह, सह कोषाध्यक्ष कमलेश बैश्य प्रबन्ध समिति सदस्य गण अखिलेन्द्र सिंह, अनिल मिश्र, डॉ पी एन मिश्र , मनीराम पटेल, शत्रुघन सिंह, डॉ अशोक अग्रहरि, राज किशोर मिश्र, पूर्व प्रधान कमला कांत व प्रधान प्रतिनिधि पूरे तोरई राम पूजन पटेल आदि ने प्रसन्नता व्यक्त की है।



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