प्रयागराज। उत्तर प्रदेश चुनाव नज़दीक आते देख कर सभी राजनैतिक पार्टियों ने अपने अपने अन्दाज़ में तैयारियां शुरू कर दी हैं। जहां सत्ता पक्ष के नेता अपने पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों को लेकरऔर लोकलुभावन वाले वादे के साथ जनता के बीच जा रहे हैं। वहीं विपक्षी पार्टियां सरकार की पांच वर्षों की विफ़लताओं बेरोज़गारी, महंगाई, भृष्टाचार, ख़राब क़ानून व्यवस्था,बेटियों पर बढ़ते अपराधिक मामले, कोरोना के दौरान ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों, कृषि के तीनों क़ानून, किसान आंदोलन और देश भर में नदियों में आई बाढ़ के कारण लोगों को समय से राहत कार्यों में विफ़लताओं से जनता की बढ़ती जा रही परेशानी जैसे मुद्दों के आधार पर जनता का ध्यान आकर्षित करने में लगी हैं। बुधवार को कांग्रेस पार्टी के अल्पसंख्यक महानगर अध्यक्ष अरशद अली ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ अटाला स्थित मजिदिया इस्लामिया इण्टर कॉलेज चौराहे पर केंडिल जला कर सरकार का विरोध जताया। इस अवसर पर अरशद अली ने कहा कि अंग्रेज़ों की भांति केन्द्र और उत्तर प्रदेश की जन विरोधी कार्यों को लेकर मऊ में कांग्रेस कार्यकर्ता लोकतांत्रिक ढंग से विरोध कर रहे थे। योगी सरकार ने पुलिस के माध्यम से कायरतापूर्ण कार्यवाही करते हुए उन आंदोलनकारियों पर बर्बरतापूर्ण तऱीके से लाठियां बरसाई हैं जिसकी जितनी भी निन्दा और आलोचना की जाए उतनी कम है। अरशद अली ने कहा कि अंग्रेज़ो के पथ पर चल कर देश और प्रदेश में राज कर रही भाजपा सरकार जहां जनता के अधिकारों का दमन कर रही हैं। वहीं विरोध जताने पर पुलिस की लाठियों के माध्यम से आवाज़ो को दबाने का प्रयास कर रही है. लेकिन कांग्रेस पार्टी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देश की ख़ातिर हंसते हंसते अंग्रेज़ों की लाठियों और गोलियों को सहन करते हुए देश को अँग्रेज़ी शासकों से मुक्ति दिलाने का काम किया है। उसी की तर्ज़ भाजपा सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलना चाहती है लेकिन आज के कांग्रेसी सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, लल्लु जी, शहनवाज़ आलम के नेतृत्व में इससे न डरने वाले हैं और न घबराने वाले हैं। देश प्रदेश की जनता को भी इस दमनकारी सरकार से भी मुक्ति दिलाकर ही दम लेगी।
इस अवसर पर पूर्व प्रवक्ता जावेद उर्फी, प्रदेश सचिव इरफानुल हक, रोहन सिंह महफूज अहमद, अनूप सिंह, कमाल अली, मीडिया प्रभारी एम.टी.क़ादरी, मुस्तकीन कुरेशी, नूरूल कुरेशी, तालिब अहमद, तालिब अहमद, अरमान कुरेशी, साबिर फरीदी, परवेज़ ख़ान आदि उपस्थित थे।



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