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फोटो मोक्षदायिनी मां गंगा ने किया लेटे हनुमान जी का जलाभिषेक

प्रयागराज। संगम तट पर स्थित लेटे हनुमान जी का मोक्षदायिनी मां गंगा ने गुरुवार को जलाभिषेक किया। बढ़ रहे गंगा जमुना के जलस्तर ने आज दोपहर बाद हनुमान जी के मंदिर में प्रवेश किया। उस समय उपस्थित पुजारियों ने पुष्पमाला अर्पित कर आरती की और जल हटने तक कपाट बंद कर दिए। बंधवा स्थित लेटे हनुमान जी को प्रयाग का थानेदार भी कहा जाता है और भगवान शिव के इस 11वें रुद्राक्ष अवतार सदैव ही मंगलमय और दानी माने गए। वहीं पर बगल में बहती मां गंगा की अविरल मोक्षदायिनी धारा अपने आप में अमृत का स्वरूप है और जब यह दोनों मिलते हैं तो माता और पुत्र का मिलन सदैव लोगों के लिए मोक्ष एवं अमृत की वर्षा करती है। आज प्रयागराज में गंगा नदी के जलस्तर की बढ़ोतरी के बाद दोपहर के 12:54 पर हनुमान जी का जलाभिषेक कर विश्व में फैली महामारी और पाप का अंत करने निकल पड़ी। लोगों ने जय घोष और आरती कर मां और बेटे की इस मिलन का पूरी श्रद्धा के साथ दर्शन किया। पिछले दो वर्षों से लगातार लेटे हनुमान जी का जलाभिषेक नहीं हो पाया। जिसकी वजह से बड़े-बड़े पंडितों को विद्वानों का मानना है पूरे विश्व में व्याप्त कोरोना जैसी महामारी का जन्म हुआ। सावन माह के प्रदोष काल में हुए इस मिलन के कारण सभी नक्षत्रों में एक प्रभावशाली और फलदाई ऊर्जा का संचार हुआ है। जिससे करोना जैसी जानलेवा महामारी का अंत होगा।

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प्रयागराज। संगम तट पर स्थित लेटे हनुमान जी का मोक्षदायिनी मां गंगा ने गुरुवार को जलाभिषेक किया। बढ़ रहे गंगा जमुना के जलस्तर ने आज दोपहर बाद हनुमान जी के मंदिर में प्रवेश किया। उस समय उपस्थित पुजारियों ने पुष्पमाला अर्पित कर आरती की और जल हटने तक कपाट बंद कर दिए। बंधवा स्थित लेटे हनुमान जी को प्रयाग का थानेदार भी कहा जाता है और भगवान शिव के इस 11वें रुद्राक्ष अवतार सदैव ही मंगलमय और दानी माने गए। वहीं पर बगल में बहती मां गंगा की अविरल मोक्षदायिनी धारा अपने आप में अमृत का स्वरूप है और जब यह दोनों मिलते हैं तो माता और पुत्र का मिलन सदैव लोगों के लिए मोक्ष एवं अमृत की वर्षा करती है। आज प्रयागराज में गंगा नदी के जलस्तर की बढ़ोतरी के बाद दोपहर के 12:54 पर हनुमान जी का जलाभिषेक कर विश्व में फैली महामारी और पाप का अंत करने निकल पड़ी। लोगों ने जय घोष और आरती कर मां और बेटे की इस मिलन का पूरी श्रद्धा के साथ दर्शन किया। पिछले दो वर्षों से लगातार लेटे हनुमान जी का जलाभिषेक नहीं हो पाया। जिसकी वजह से बड़े-बड़े पंडितों को विद्वानों का मानना है पूरे विश्व में व्याप्त कोरोना जैसी महामारी का जन्म हुआ। सावन माह के प्रदोष काल में हुए इस मिलन के कारण सभी नक्षत्रों में एक प्रभावशाली और फलदाई ऊर्जा का संचार हुआ है। जिससे करोना जैसी जानलेवा महामारी का अंत होगा।

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