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आम जनता, छात्र-छात्राओं और पुलिसकर्मियों को दी जाएगी एक्सीडेंट के समय त्वरित कार्यवाही की ट्रेनिंगः डॉ पियूष मिश्रा

इंडियन आर्थोपेडिक एसोसिएशन की इस वर्ष की टीम सेव सेल्फ सेवन हैः डॉ. सचिन
प्रयागराज। राष्ट्रीय बोन और ज्वाइंट दिवस 2012 से हर साल 4 अगस्त को मनाया जाता है। इस संदर्भ में इस वर्ष 1 अगस्त से 7 अगस्त तक हर साल पूरे देश में सप्ताह भर की गतिविधियों का आयोजन किया गया है। 2021 के लिए इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन ने थीम के रूप में “सेव सेल्फ-सेव वन” लिया है। यह बातें इंडियन आर्थोपेडिक एसोसिएशन की इलाहाबाद शाखा के अध्यक्ष डॉ पियूष मिश्रा और सचिव डॉक्टर सचिन यादव ने प्रेस वार्ता में कहीं।  उन्होंने कहा कि यह वर्ष भारत में एक्सीडेंट और दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों पर केंद्रित है। विश्व सड़क सांख्यिकी, 2018 में रिपोर्ट किए गए 199 देशों में सड़क यातायात दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में भारत पहले स्थान पर है। इसके बाद चीन और अमेरिका का स्थान है। कैलेंडर वर्ष 2019 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ( यूटी ) द्वारा कुल 4,49,002 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं । 1,51,113 लोगों ने जान गवाई , वहीं 4,51,361 लोग घायल हुए । दुर्घटनाओं के शिकार व्यस्कों में कुल 69.3 : प्रतिशत व्यक्ति 18-45 वर्ष की आयु वाले थे। कुल सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों में 18 से 60 के कामकाजी आयु की हिस्सेदारी 84.3 प्रतिशत थी। कुल दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में पुरुषों की संख्या 86 फीसदी थी , जबकि 2019 में महिलाओं की हिस्सेदारी 14 फीसदी के आसपास रही इनमें से अधिकांश मौतें दुर्घटना के बाद पहले स्वर्णिम घटे में प्राथमिक चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण होती हैं।
उन्होंने कहा कि इनमें से कई दुर्घटना पीडितों की जान दुर्घटना के तुरंत बाद उचित प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करके बचाई जा सकती है। जो कि किसी भी उस आम आदमी या पुलिस व्यक्ति द्वारा प्रदान की जा सकती है जिसे कि इसका प्रशिक्षण मिला हो। हमारे देश में दुर्घटना के तुरंत बाद उचित प्राथमिक चिकित्सा बेसिक लाइफ सपोर्ट के बीच की यह कड़ी गायब है। भारतीय हड्डी रोग संघ द्वारा 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाए जाने वाले बोन एंड ज्वाइंट वीक के दौरान एक लाख छात्रों, पुलिस व्यक्तिगत, आम आदमी ( द मिसिंग लिंक ) को प्रशिक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया है ताकि वो जीवन रक्षक बन सके सके। यह प्रशिक्षण पूरे भारत में भारतीय हड्डी रोग संघ के सदस्यों द्वारा प्रदान किया जाएगा। साथ ही उन्हें हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखने के तरीकों के बारे में भी बताया जाएगा। इसके अलावा इस सप्ताह के दौरान कई और गतिविधियां इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के सदस्यों के लिए आयोजित की जायेंगे जैसे टॉक ऑन, कार्य संतुलन पेशेवर जीवन से परे जीवन, वित्तीय स्वास्थ्य, स्व – स्वास्थ्य आदि।

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इंडियन आर्थोपेडिक एसोसिएशन की इस वर्ष की टीम सेव सेल्फ सेवन हैः डॉ. सचिन
प्रयागराज। राष्ट्रीय बोन और ज्वाइंट दिवस 2012 से हर साल 4 अगस्त को मनाया जाता है। इस संदर्भ में इस वर्ष 1 अगस्त से 7 अगस्त तक हर साल पूरे देश में सप्ताह भर की गतिविधियों का आयोजन किया गया है। 2021 के लिए इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन ने थीम के रूप में “सेव सेल्फ-सेव वन” लिया है। यह बातें इंडियन आर्थोपेडिक एसोसिएशन की इलाहाबाद शाखा के अध्यक्ष डॉ पियूष मिश्रा और सचिव डॉक्टर सचिन यादव ने प्रेस वार्ता में कहीं।  उन्होंने कहा कि यह वर्ष भारत में एक्सीडेंट और दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों पर केंद्रित है। विश्व सड़क सांख्यिकी, 2018 में रिपोर्ट किए गए 199 देशों में सड़क यातायात दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में भारत पहले स्थान पर है। इसके बाद चीन और अमेरिका का स्थान है। कैलेंडर वर्ष 2019 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ( यूटी ) द्वारा कुल 4,49,002 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं । 1,51,113 लोगों ने जान गवाई , वहीं 4,51,361 लोग घायल हुए । दुर्घटनाओं के शिकार व्यस्कों में कुल 69.3 : प्रतिशत व्यक्ति 18-45 वर्ष की आयु वाले थे। कुल सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों में 18 से 60 के कामकाजी आयु की हिस्सेदारी 84.3 प्रतिशत थी। कुल दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में पुरुषों की संख्या 86 फीसदी थी , जबकि 2019 में महिलाओं की हिस्सेदारी 14 फीसदी के आसपास रही इनमें से अधिकांश मौतें दुर्घटना के बाद पहले स्वर्णिम घटे में प्राथमिक चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण होती हैं।
उन्होंने कहा कि इनमें से कई दुर्घटना पीडितों की जान दुर्घटना के तुरंत बाद उचित प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करके बचाई जा सकती है। जो कि किसी भी उस आम आदमी या पुलिस व्यक्ति द्वारा प्रदान की जा सकती है जिसे कि इसका प्रशिक्षण मिला हो। हमारे देश में दुर्घटना के तुरंत बाद उचित प्राथमिक चिकित्सा बेसिक लाइफ सपोर्ट के बीच की यह कड़ी गायब है। भारतीय हड्डी रोग संघ द्वारा 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाए जाने वाले बोन एंड ज्वाइंट वीक के दौरान एक लाख छात्रों, पुलिस व्यक्तिगत, आम आदमी ( द मिसिंग लिंक ) को प्रशिक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया है ताकि वो जीवन रक्षक बन सके सके। यह प्रशिक्षण पूरे भारत में भारतीय हड्डी रोग संघ के सदस्यों द्वारा प्रदान किया जाएगा। साथ ही उन्हें हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखने के तरीकों के बारे में भी बताया जाएगा। इसके अलावा इस सप्ताह के दौरान कई और गतिविधियां इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के सदस्यों के लिए आयोजित की जायेंगे जैसे टॉक ऑन, कार्य संतुलन पेशेवर जीवन से परे जीवन, वित्तीय स्वास्थ्य, स्व – स्वास्थ्य आदि।

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