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कहीं कहीं सई मे हो रही मौतों के लिए जिम्मेदार है हद तक की प्रशासनिक लापरवाही..

लालगंज प्रतापगढ़। सई नदी मे डूब कर श्रद्धालुओं के मौत का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। प्रत्येक विशेष पर्वो पर सई के गहरे पानी मे समा जाने से आकस्मिक मौतें भी प्रशासन के लिए जरा सा भी सबक नही है। अभी इसके पहले भी बीते सावन मे सलेम भदारी के शिक्षक ज्योति प्रसाद दुबे का पुत्र शितांशु 15 भी दर्शन करने के लिए बाबा धाम गया था। अचानक सई मे समा जाने से उसकी भी दर्दनाक मौत हो गयी थी। सावन माह मे रोक के बावजूद कांवड यात्रा को लेकर आस्था बाबा धाम मे उत्साह मे देखी जा रही है। वहीं सावन माह के होने के कारण स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा पडोसी जिले अमेठी, सुल्तानपुर, रायबरेली तथा प्रयागराज तक से श्रद्धालु रोज दर्शन करने हजारो की संख्या मे बाबा धाम मे जुट रहे है। इधर सई नदी के जलस्तर मे भी लगातार वृद्धि हो रही है। इसके बावजूद भी स्थानीय प्रशासन ने न तो सई मे बैरीकेटिंग के प्रबन्ध किये है और न ही विशेष माह मे किसी मजिस्ट्रेट की तैनाती ही की गई है। हजारों श्रद्धालुओं के दिन रात जमघट के बावजूद बाबा धाम मे पुलिस की तैनाती भी रूटीन दिनो की तरह देखी जा रही है। मंगलवार की घटना को लेकर श्रद्धालुओं को प्रशासनिक प्रबन्धो की लापरवाही को लेकर गुस्से मे भी देखा गया। 

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लालगंज प्रतापगढ़। सई नदी मे डूब कर श्रद्धालुओं के मौत का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। प्रत्येक विशेष पर्वो पर सई के गहरे पानी मे समा जाने से आकस्मिक मौतें भी प्रशासन के लिए जरा सा भी सबक नही है। अभी इसके पहले भी बीते सावन मे सलेम भदारी के शिक्षक ज्योति प्रसाद दुबे का पुत्र शितांशु 15 भी दर्शन करने के लिए बाबा धाम गया था। अचानक सई मे समा जाने से उसकी भी दर्दनाक मौत हो गयी थी। सावन माह मे रोक के बावजूद कांवड यात्रा को लेकर आस्था बाबा धाम मे उत्साह मे देखी जा रही है। वहीं सावन माह के होने के कारण स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा पडोसी जिले अमेठी, सुल्तानपुर, रायबरेली तथा प्रयागराज तक से श्रद्धालु रोज दर्शन करने हजारो की संख्या मे बाबा धाम मे जुट रहे है। इधर सई नदी के जलस्तर मे भी लगातार वृद्धि हो रही है। इसके बावजूद भी स्थानीय प्रशासन ने न तो सई मे बैरीकेटिंग के प्रबन्ध किये है और न ही विशेष माह मे किसी मजिस्ट्रेट की तैनाती ही की गई है। हजारों श्रद्धालुओं के दिन रात जमघट के बावजूद बाबा धाम मे पुलिस की तैनाती भी रूटीन दिनो की तरह देखी जा रही है। मंगलवार की घटना को लेकर श्रद्धालुओं को प्रशासनिक प्रबन्धो की लापरवाही को लेकर गुस्से मे भी देखा गया। 

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