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सेना के जवान के साथ प्रशासन तथा शासन द्वारा भेदभाव

बाबा बेलखरनाथ धाम I जोधपुर में तैनात सेना के जवान की तबीयत खराब होने के बाद इलाज के दौरान मौत हो जाने से जहां जवान के मां और पिता तथा पत्नी चंद्रलोक तिवारी उन्हें नाज है लेकिन जनप्रतिनिधियों तथा शासन और प्रशासन द्वारा भेदभाव को लेकर सेना के जवान परिजनों सहित ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है बताते चलें कि जिले के रितेश पाल के शहीद होने पर जहां जनप्रतिनिधि से लेकर जिला प्रशासन और शासन स्तर के लोग पहुंच कर परिजनों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ राजकीय सम्मान के साथ दाह संस्कार किया गया वही बीमारी से जवान की मौत होने पर शव घर पहुंचने पर कोई भी जनप्रतिनिधि सराय नान कार नहीं पहुंचा और ना ही जिला प्रशासन और शासन द्वारा कोई परिजनों को आर्थिक सहायता नहीं दी गई इस मामले को लेकर ब्राह्मण समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों के लोग भेदभाव की बात कर रहे हैं साथ ही साथ आक्रोश भी दिखाई दे रहा है। आखिर यह कैसा भेदभाव है कि वही जिले के 1 शहीद को सम्मान के साथ दाह संस्कार किया गया दूसरी तरफ चंद्रलोक के परिजन स्वयं से अपने संसाधन द्वारा दाह संस्कार के लिए रसूलाबाद लेकर गए वहां प्रयागराज में सेना द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दाह संस्कार हुआ लेकिन जिले के किसी भी जनप्रतिनिधि ने चंद्रलोक तिवारी के गांव पहुंचने के लिए मुनासिब नहीं समझा।

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बाबा बेलखरनाथ धाम I जोधपुर में तैनात सेना के जवान की तबीयत खराब होने के बाद इलाज के दौरान मौत हो जाने से जहां जवान के मां और पिता तथा पत्नी चंद्रलोक तिवारी उन्हें नाज है लेकिन जनप्रतिनिधियों तथा शासन और प्रशासन द्वारा भेदभाव को लेकर सेना के जवान परिजनों सहित ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है बताते चलें कि जिले के रितेश पाल के शहीद होने पर जहां जनप्रतिनिधि से लेकर जिला प्रशासन और शासन स्तर के लोग पहुंच कर परिजनों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ राजकीय सम्मान के साथ दाह संस्कार किया गया वही बीमारी से जवान की मौत होने पर शव घर पहुंचने पर कोई भी जनप्रतिनिधि सराय नान कार नहीं पहुंचा और ना ही जिला प्रशासन और शासन द्वारा कोई परिजनों को आर्थिक सहायता नहीं दी गई इस मामले को लेकर ब्राह्मण समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों के लोग भेदभाव की बात कर रहे हैं साथ ही साथ आक्रोश भी दिखाई दे रहा है। आखिर यह कैसा भेदभाव है कि वही जिले के 1 शहीद को सम्मान के साथ दाह संस्कार किया गया दूसरी तरफ चंद्रलोक के परिजन स्वयं से अपने संसाधन द्वारा दाह संस्कार के लिए रसूलाबाद लेकर गए वहां प्रयागराज में सेना द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दाह संस्कार हुआ लेकिन जिले के किसी भी जनप्रतिनिधि ने चंद्रलोक तिवारी के गांव पहुंचने के लिए मुनासिब नहीं समझा।

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