प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। नकदी फसलो के लिए जनपद के किसान हाइब्रिड बीज को प्राथमिकत दे रहे है। खासकर सब्जी की खेती में तो हाइब्रिड बीजो का ही जलवा है। इन बीजो से बेहतर उत्पादकता हासिल कर किसानो की माली हालत में भी सुधार हो रहा है। मशीनीकरण के साथ ही अधिक उत्पादन की चाहत में किसान हाइब्रिड बीज अधिक पसंद करने लगे है। खासतौर पर सब्जी की खेती के मामले में अधिकांश किसानो ने देशी बीजो में काफी हद तक किनारा कर लिया है। जानकारो की माने तो जिले के 50 से 60 फीसदी किसान हाइब्रिड बीजो से सब्जी का उत्पादन करते हैं जबकि बाकी किसान देशी बीजो से ही काम निकाल लेते है। जहां तक हाइब्रिड बीज आधारित खेती का सवाल है तो किसानो को इससे बेहतर मुनाफा मिल रहा है। यह अलग बात है कि किसान मानते है कि हाइब्रिड खेती वाले उत्पाद उतने पौष्टिक नहीं होते जितना देशी। इसके बावजूद किसान ज्यादा मुनाफे के लिए इन बीजो का ही सहारा ले रहे है। शायद यही वजह है कि जिले के किसानो के लिए आलू, टमाटर, मूली, मिर्च, भिण्डी, तरबूज, खरबूज, फूलगोभी पत्तागोभी, खीरा, गाजर, लौकी करेला, बैगन, चुकन्दर, प्याज, बाजरा, धान की खेती, मूल तौर पर हाइब्रिड बीजो पर ही आधारित हो चुकी है। मक्का और बाजरा की खेती ें भी किसान बेहतर उत्पादन के लिए हाइब्रिड बीजो का इस्तेमाल कर रहे है। बाजार में हाइब्रिड बीज पायोनियर, डैकल्ब, सनसीड, सुवीज, निर्मल, सम्राट, भीम आदि अनेक नाम से बीज विक्रेताओ के यहां से किसान खरीद रहे है। इस सम्बंध में विशेषज्ञो का कहना है कि देश में आयी हरित क्रांति में शंकर बीज हाइब्रिड का खासा योगदान है। हाइब्रिड बीज से सब्जियो के अलावा अनाज का उत्पादन ही बेहतर नहीं होता बल्कि हाइब्रिड बीज की फसले स्वादिष्ट भी होती है। लेकिन किसान हाइब्रिड बीज से एक बार फसल लेने के बाद दुबारा हाइब्रिड बीज को रोपकर खेत से फसल नहीं ले सकता। जानकारो का कहना है कि बाजरा की देशी फसल अधिक पसंद की जाती है। जबकि मक्का की हाइब्रिड शंकर फसल अधिक स्वादिष्ट होती है। देशी फसल का दाना कम ही पसंद किया जाता है। इसलिए किसान कम भूमि और कम लागत से ज्यादा मुनाफा कमा रहे है।



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