प्रशासन नहीं लगा पा रहा अंकुश
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। जिले में खाद्य पदार्थो में मिलावट खोरी चरम पर है। प्रशासन द्वारा लाख प्रयास किए जाने के बावजूद मिलावट खोर अपनी हरकतो से बाज नहीं आ रहे है। कालाबाजारी के जरिए अधिक धन कमाने के इस अंधे युग में धन लोभी सारी सीमाएं पार करते जा रहे है। इससे लोगो की सेहत के लिए भी भारी नुकसान हो रहा हे। बताते चले कि प्रशासन यदा कदा नमूने लेकर अपना कर्तव्य पूरा करके इतिश्री कर लेता है। उधर मिलावट खोर आम आदमी की जिन्दगी से खिलवाड़ करने में जुटे है। इसकी बानगी जिले के प्रत्येक बाजारो में खुली दुकानो पर देखी जा सकती है। किराना दुकानदारो के यहां पिसी हल्दी, धनियां, मिर्च, गरम मसाला, बेसन, नमक तेल आदि के मिलावट का धंधा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। उसे रोकने के लिए अभियान चलाने की जरूरत है। छोटी बड़ी सभी बाजारो में खाद्य पदार्थो में मिलावट का कारोबार दिन दूना रात चैगुना की गति से बढ़ रहा है। किराना की दुकानो में पिसी हल्दी व धनिया में कना तथा लाल मिर्च में गेरू मिलाकर बेचा जा रहा है। कस्बे व गांव की अनेक दुकानो में हर मर्ज की दवाइयां उपलब्ध रहती है। दूध का काम करने वाले दूधियो द्वारा िमलावट करके आम जन से धोखाधड़ी की जा रही है। मिलावट खोरी इस कदर चरम पर पहुंच चुकी है कि अब इसे रोक पाना विभागीय अधिकारियो के बस की बात नहीं है। इतना ही नहीं मोबिल, डीजल व अन्य मिलावटी सामान बेचकर तथा शुद्धता की गारण्टी देकर किसानो को भी लूटा जा रहा है। किसानो का कहना है कि इंजन में बाजार से खरीदकर मोबिल डालने पर आधे घण्टे में ही उसका रंग बदल जाता है। इसकी शिकायत करने पर दुकानदार कहता है कि कम्पनी ने जो पैक कर दिया वही हम बेच रहे है। बताया जाता है कि डीजल में नेप्था मिलाया जा रहा है। जबकि मोबिल में रंग डालकर पैक कर दिया जाता है। महंगाई के चलते दुकानदार अधिक आय अर्जित करने के चक्कर में मिलावट का कारोबार धड़ल्ले के साथ कर रहे है। इस कार्य से चाहे किसी की जान क्यो न चली जाए। आजकल होटलो में भी मिलावट का धंधा जोरो पर है। रसगुल्ला में सीमा पाउडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। पेड़ा, बर्फी, आदि में प्रयोग किया जाने वाला खोआ इतना घटिया व मिलावटी होता है कि जो अधिक दिनो तक नहीं चल पाता। इसके बावजूद सड़े हुए खोये से मिठाई तैयार की जाती है।
प्रशासन नहीं लगा पा रहा अंकुश
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। जिले में खाद्य पदार्थो में मिलावट खोरी चरम पर है। प्रशासन द्वारा लाख प्रयास किए जाने के बावजूद मिलावट खोर अपनी हरकतो से बाज नहीं आ रहे है। कालाबाजारी के जरिए अधिक धन कमाने के इस अंधे युग में धन लोभी सारी सीमाएं पार करते जा रहे है। इससे लोगो की सेहत के लिए भी भारी नुकसान हो रहा हे। बताते चले कि प्रशासन यदा कदा नमूने लेकर अपना कर्तव्य पूरा करके इतिश्री कर लेता है। उधर मिलावट खोर आम आदमी की जिन्दगी से खिलवाड़ करने में जुटे है। इसकी बानगी जिले के प्रत्येक बाजारो में खुली दुकानो पर देखी जा सकती है। किराना दुकानदारो के यहां पिसी हल्दी, धनियां, मिर्च, गरम मसाला, बेसन, नमक तेल आदि के मिलावट का धंधा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। उसे रोकने के लिए अभियान चलाने की जरूरत है। छोटी बड़ी सभी बाजारो में खाद्य पदार्थो में मिलावट का कारोबार दिन दूना रात चैगुना की गति से बढ़ रहा है। किराना की दुकानो में पिसी हल्दी व धनिया में कना तथा लाल मिर्च में गेरू मिलाकर बेचा जा रहा है। कस्बे व गांव की अनेक दुकानो में हर मर्ज की दवाइयां उपलब्ध रहती है। दूध का काम करने वाले दूधियो द्वारा िमलावट करके आम जन से धोखाधड़ी की जा रही है। मिलावट खोरी इस कदर चरम पर पहुंच चुकी है कि अब इसे रोक पाना विभागीय अधिकारियो के बस की बात नहीं है। इतना ही नहीं मोबिल, डीजल व अन्य मिलावटी सामान बेचकर तथा शुद्धता की गारण्टी देकर किसानो को भी लूटा जा रहा है। किसानो का कहना है कि इंजन में बाजार से खरीदकर मोबिल डालने पर आधे घण्टे में ही उसका रंग बदल जाता है। इसकी शिकायत करने पर दुकानदार कहता है कि कम्पनी ने जो पैक कर दिया वही हम बेच रहे है। बताया जाता है कि डीजल में नेप्था मिलाया जा रहा है। जबकि मोबिल में रंग डालकर पैक कर दिया जाता है। महंगाई के चलते दुकानदार अधिक आय अर्जित करने के चक्कर में मिलावट का कारोबार धड़ल्ले के साथ कर रहे है। इस कार्य से चाहे किसी की जान क्यो न चली जाए। आजकल होटलो में भी मिलावट का धंधा जोरो पर है। रसगुल्ला में सीमा पाउडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। पेड़ा, बर्फी, आदि में प्रयोग किया जाने वाला खोआ इतना घटिया व मिलावटी होता है कि जो अधिक दिनो तक नहीं चल पाता। इसके बावजूद सड़े हुए खोये से मिठाई तैयार की जाती है।



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