नैनी(प्रयागराज)। सैम हिग्गिनबाॅटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स) में चल रहे ग्रामीण कृषि मौसम सेवान्तर्गत भारत सरकार से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार वैज्ञानिकों ने पूरे सप्ताह वर्षा के आसार जताते हुए कृषकों को सलाह दी है कि खेतों में मेड़बन्दी करके नमी को संरक्षित करें तथा तालाबों , पोखरों एवं झीलों में संरक्षित वर्षा जल को फसलों की क्रान्तिक वृद्धि की दशाओं में सिंचित करने के लिये उपयोग में लाये । फसलों द्वारा जल हानि को कम करने के लिये ज्वार , मक्का तथा गन्ने की पुरानी पत्तियों को पौधों से अलग कर उन्हें पंत्तियों के बीच मल्व ( पलवार ) के रुप में प्रयोग करें । धान की ” डबल रोपाई या सण्डा प्लाटिंग ” हेतु दूसरी रोपाई पुनः पहले रोपे गये धान के 03 सप्ताह बाद 10×10 से.मी. की दूरी पर करें । छलहनी एवं तिलहनी फसलों में जल भराव न होने दें , जल निकास का उचित प्रबन्ध करें । धान की सीधी बुवाई हेतु पलेवा करके ड्रम सीडर से शीघ्र पकने वाली किस्मों ( 100 से 120 दिन ) की 50 से 55 कि.ग्रा . प्रति हे बीज की दर से बुवाई करें । मक्का की निराई , गुड़ाई तथा विरलीकरण सहित हल्की मिट्टी चढ़ाऐं तथा जल निकास का उचित प्रबंध करें । मक्का में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 2 किग्रा / हे . की दर से बुआई के 2 दिन के अन्दर 800 ली . / हे . पानी में मिलाकर छिड़काव करें । तिल में फाइलोडी रोग से बचाव हेतु आक्सीडिमेटान मिथाइल 25 प्रतिशत ई . सी . 01 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें । जलभराव वाले गन्ने की फसल में पानी निकलने के बाद 2 प्रतिशत यूरिया तथा 2 प्रतिशत म्यूरेट आफ पोटाश के घोल का छिड़काव करें । गोल बैंगन , मध्य कालीन फूल गोभी तथा शिमला मिर्च की अगस्त माह में रोपाई हेतु बीज की बुवाई उठी हुई क्योरियों तथा लो टनल में करें । अदरक के कंद सड़न रोग से बचाव हेतु जल निकास का उचित प्रबंध करें तथा प्रकोप कोन पर चेस्टनट कम्पाउंड का सस्तुति अनुसार छिड़काव करें । • टमाटर की अगेती संस्तुत किस्मों की बुवाई करें । • यदि पानी का रंग गहरा नीला हो जाता है तो यह मछलियों के लिये हानिकारक है । कृषकों / पशुपालकों के द्वारा पर पशुचिकित्सा उपलब्ध कराने हेतु विभाग के द्वारा मोबाइल वेटनरी यूनिट योजना का संचालन किया जा रहा है । इस योजना का लाभ लेने सभी कृषक / पशुपालक टोल फ्री हेल्पलाइन नं०-1962 पर सम्पर्क पर योजना का लाभ ले सकते हैं ।
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शुआट्स वैज्ञानिकों की सलाह, पूरे सप्ताह वर्षा के आसार

नैनी(प्रयागराज)। सैम हिग्गिनबाॅटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स) में चल रहे ग्रामीण कृषि मौसम सेवान्तर्गत भारत सरकार से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार वैज्ञानिकों ने पूरे सप्ताह वर्षा के आसार जताते हुए कृषकों को सलाह दी है कि खेतों में मेड़बन्दी करके नमी को संरक्षित करें तथा तालाबों , पोखरों एवं झीलों में संरक्षित वर्षा जल को फसलों की क्रान्तिक वृद्धि की दशाओं में सिंचित करने के लिये उपयोग में लाये । फसलों द्वारा जल हानि को कम करने के लिये ज्वार , मक्का तथा गन्ने की पुरानी पत्तियों को पौधों से अलग कर उन्हें पंत्तियों के बीच मल्व ( पलवार ) के रुप में प्रयोग करें । धान की ” डबल रोपाई या सण्डा प्लाटिंग ” हेतु दूसरी रोपाई पुनः पहले रोपे गये धान के 03 सप्ताह बाद 10×10 से.मी. की दूरी पर करें । छलहनी एवं तिलहनी फसलों में जल भराव न होने दें , जल निकास का उचित प्रबन्ध करें । धान की सीधी बुवाई हेतु पलेवा करके ड्रम सीडर से शीघ्र पकने वाली किस्मों ( 100 से 120 दिन ) की 50 से 55 कि.ग्रा . प्रति हे बीज की दर से बुवाई करें । मक्का की निराई , गुड़ाई तथा विरलीकरण सहित हल्की मिट्टी चढ़ाऐं तथा जल निकास का उचित प्रबंध करें । मक्का में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 2 किग्रा / हे . की दर से बुआई के 2 दिन के अन्दर 800 ली . / हे . पानी में मिलाकर छिड़काव करें । तिल में फाइलोडी रोग से बचाव हेतु आक्सीडिमेटान मिथाइल 25 प्रतिशत ई . सी . 01 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें । जलभराव वाले गन्ने की फसल में पानी निकलने के बाद 2 प्रतिशत यूरिया तथा 2 प्रतिशत म्यूरेट आफ पोटाश के घोल का छिड़काव करें । गोल बैंगन , मध्य कालीन फूल गोभी तथा शिमला मिर्च की अगस्त माह में रोपाई हेतु बीज की बुवाई उठी हुई क्योरियों तथा लो टनल में करें । अदरक के कंद सड़न रोग से बचाव हेतु जल निकास का उचित प्रबंध करें तथा प्रकोप कोन पर चेस्टनट कम्पाउंड का सस्तुति अनुसार छिड़काव करें । • टमाटर की अगेती संस्तुत किस्मों की बुवाई करें । • यदि पानी का रंग गहरा नीला हो जाता है तो यह मछलियों के लिये हानिकारक है । कृषकों / पशुपालकों के द्वारा पर पशुचिकित्सा उपलब्ध कराने हेतु विभाग के द्वारा मोबाइल वेटनरी यूनिट योजना का संचालन किया जा रहा है । इस योजना का लाभ लेने सभी कृषक / पशुपालक टोल फ्री हेल्पलाइन नं०-1962 पर सम्पर्क पर योजना का लाभ ले सकते हैं ।



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