प्रोत्साहन के अभाव में बेंटिलेटर पर पहुंच गया आंवला किसान
एक तिहाई घट गई प्रतापगढ़ में आंवला की उत्पादकता
प्रतापगढ़ । सहकार भारती के विचार गोष्ठी के दौरान आंवला किसानों की दुर्दशा को लेकर चर्चा करते हुए अध्यक्ष भास्कर शर्मा के निर्देश पर महामंत्री डीकेशर्मा नें आंवला किसानों की स्थिति से अवगत कराया । बताया कि आंवला प्रतापगढ़ की पहचान है जिसे प्रशानिक उदासीनता के चलते बेंटिलेटर पर देखा जा सकता है । उन्होंने बताया कि जहाँ किसान को आंवले की सही कीमत नहीं मिल पा रही है वहीं आंवला किसान प्रोत्साहन और प्रशिक्षण के अभाव में सही उत्पादन भी नहीं कर पा रहा है । जिससे किसान का आंवला से मोह भंग होता जा रहा है जिसकी वजह से प्रतापगढ़ में आंवला उत्पादकता करीब सिर्फ दो तिहाई रह गई है । प्रतापगढ़ की मंडियों में अब बाहर से आंवले का आना आंवला पूर्ति की कहानी साफ़ दिखाई पड़ती है । प्रतापगढ़ का बेहतरीन आंवला एन 7 और एन10 की डिमांड आज भी बहुत अधिक है किंतु आपूर्ति तो तब होगी जब उत्पादन बढ़े । यहाँ बातचीत के दौरान उद्यान निरीक्षक मो फ़ाजिल का कथन माने तो आंवला किसान आंवला के पेड़ों की सही देखरेख नहीं कर रहे है किसानों द्वारा खेतों में जिन खादों और पानी को डाला जा रहा है उसी से आंवले के पेड़ों को भी वह पाल रहा है इतना ही नहीं पेड़ों के नीचे रिंग बना कर उन्हें अलग से खाद में औसतन यूरिया , फास्फोरस , पोटास नहीं दे रहा जिससे कि उत्पादन स्वतः कम हो जाती है । अब बात करें किसानों की अधिक से अधिक आंवला उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किए जाने की तो आंवला किसान हतोत्साहित होकर कई कई एकड़ आंवले की बाग खत्म करता नज़र आ रहा। ऐसे कई किसान अब मोहभंग होने के चलते आंवले की बागवानी से दूर हो गए हैं । चर्चाओं में उपाध्यक्ष आलोक आजाद नें आंवला उत्पादन और आंवला उत्पाद पर प्रतापगढ़ की जमीनी पहचान बनाए रखने हेतु सहकार करने के लिए किसानों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए सहभागिता हेतु संगठन के सभी लोगों का आह्वान किया । इस दौरान एस एच जी प्रमुख़ पूर्णिमा मिश्रा , मंत्री प्रवीण उपाध्याय , मंत्री नवीन पुजारी , सदस्य राहुल सिंह , बाबा श्याम लाल , सदर अध्यक्ष राजेश फौजी , सदर उपाध्यक्ष सुनील शुक्ला समेत कई पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे ।